हजारों सालों से योग भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है ,योग न केवल आपके मन को शांत रखता है बल्कि आपके शरीर को रोगों से दूर रखता है। आज पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। योग 5 हजार सालों से हमारी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। आइये जानते है अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बारे में कुछ रोचक जानकारिया।
"योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।"
-- नरेंद्र मोदी , संयुक्त राष्ट्र महासभा
जिसके बाद 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" घोषित किया गया। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" को मानाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया , जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे काम समय है।
"संयुक्त राष्ट्र संघ से मंजूरी मिलने के बाद ,सर्वप्रथम 21 जून 2015 को पूरे विश्व में 'विश्व योग दिवस' के नाम से मनाया"
संयुक्त राष्ट्र के घोसणा करने के बाद , श्री श्री रविशंकर ने नरेंद्र मोदी के प्रयसों की सराहना करते हुए कहा :
कैसे हुई योग दिवस की शुरुआत :
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है। पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण से की थी जिसमे उन्होंने कहा :
"योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आयें एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।"
-- नरेंद्र मोदी , संयुक्त राष्ट्र महासभा
जिसके बाद 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" घोषित किया गया। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" को मानाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया , जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे काम समय है।
"संयुक्त राष्ट्र संघ से मंजूरी मिलने के बाद ,सर्वप्रथम 21 जून 2015 को पूरे विश्व में 'विश्व योग दिवस' के नाम से मनाया"
क्यों 21 जून को मनाया जाता है ?
क्या आपने कभी सोचा है की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है,इसके पीछे भी एक ख़ास वजह है। दरअसल 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लम्बा दिन होता है ,जिसे कुछ लोग ग्रीष्म संक्रांति भी कहकर बुलाते है। इसी वजह से 21 जून के दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मानते है।
संयुक्त राष्ट्र के घोसणा करने के बाद , श्री श्री रविशंकर ने नरेंद्र मोदी के प्रयसों की सराहना करते हुए कहा :
"किसी भी दर्शन, धर्म या संस्कृति के लिए राज्य के संरक्षण के बिना जीवित रहना बहुत मुश्किल है। योग लगभग एक अनाथ की तरह अब तक अस्तित्व में था। अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्वभर में फैलाएगी।"
भारत के नाम दर्ज रिकॉर्ड-
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गणमान्य लोगों सहित करीब 36000 लोगों ने , 21 जून 2015 को नई दिल्ली में पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस के लिए 35 मिनट तक 21 योग आसन (योग मुद्राओं) का प्रदर्शन किया। योग दिवस दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा मनाया गया।
राजपथ पर हुए समारोह ने दो गिनीज रिकॉर्ड्स की स्थापना की: सबसे बड़ी योग क्लास 35,985 लोगों के साथ और 84 देशों के लोगों द्वारा इस आयोजन में एक साथ भाग लेने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इस रिकॉर्ड को आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने स्वयं ग्रहण किया।
योग पर विवाद -
इस दिवस का विवादों में अपना हिस्सा था। सरकार ने 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के दौरान विवाद से बचने के लिए "सूर्य नमस्कार" व "श्लोक" जप की अनिवार्यता को आधिकारिक योग कार्यक्रम से हटा दिया और मुसलमानों से इस आयोजन में भाग लेने की अपील की। आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने मुसलमानों से इस कार्यक्रम के दौरान श्लोक के स्थान पर अल्लाह के नाम को पढ़ लेने का सुझाव दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सूर्य नमस्कार को धर्म के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया। मुस्लिम अल्पसंख्यक इसे केवल "हिंदू एजेंडा" मानते थे ।



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